तेजस्वी की नरमी तथा नीतीश पर राहुल की चुप्पी पर संदेह, क्या अभी भी खेल बाकी है? - सत्य न्यूज़ हिंदी

तेजस्वी की नरमी तथा नीतीश पर राहुल की चुप्पी पर संदेह, क्या अभी भी खेल बाकी है?

नीतीश
 

नीतीश

नीतीश कुमार के राजनीति पाला बदलने की कयास शुरू होने के साथ ही साथ ये माना जाने लगा था कि जेडीयू तथा आरजेडी में कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है ।

26 जनवरी की शाम को राजभवन में कार्यक्रम में नीतीश कुमार तो दिखे लेकिन तेजस्वी यादव की कुर्सी ख़ाली रही ।

जिस समय Nitish Kumar से पूछा गया कि तेजस्वी आखिर क्यों नहीं आए तो वो बोले- जो नहीं है आया उनसे पूछिए ।

ठीक दो दिन बाद जब जेडीयू-आरजेडी गवर्नमेंट को ख़त्म करने का एलान किया तो Nitish Kumar मीडिया के सामने आए तो सभी को लगा कि अब तेजस्वी यादव से उनके असहमति खुलकर सामने आएंगे ।

लेकिन नीतीश कुमार ने केवल इतना ही कहा- सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था तो मैंने सरकार ख़त्म कर दी ।

इस चुप्पी का क्या मतलब हैं

पूर्व डीन पुष्पेंद्र सिंह ने बताया, ”नीतीश जी किसी का भी साथ कभी भी छोड़ सकते हैं, तथा किसी के भी साथ जा सकते हैं । सब ने उनके इस चरित्र को जान लिया है । सभी को लगता है कि यदि उनकी ज़रूरत पड़ी तो वो दोबारा वापस आ सकते हैं ।



भाजपा उन पर हमलावर बानी थी । जब नीतीश कुमार Nitish Kumar ने एनडीए का साथ छोड़ा था तथा आरजेडी के साथ गवर्नमेंट में आ गए थे । अमित शाह का कहना था, ”अब नीतीश कुमार के लिए एनडीए के दरवाज़े सदैव के लिए बंद हो गए हैं ।

बिहार के भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा था कि वो तब तक पगड़ी नहीं खोलेंगे । जब तक वो नीतीश कुमार को सत्ता से निकाल नहीं देंगे ।

आजकल सम्राट चौधरी ने पगड़ी पहने हुए नीतीश कुमार Nitish Kumar के साथ साथ मंत्री पद की शपथ ली तथा डिप्टी सीएम बनकर नीतीश के साथ बिहार सरकार में हैं ।

आंकड़े किस तरफ संकेत करते हैं

वर्ष 2013 में नीतीश कुमार Nitish Kumar ने एनडीए का साथ भी छोड़ा था । उस वख्त कांग्रेस, सीपीआई के सपोर्ट से नीतीश सत्ता में बने रहे थे ।

वर्ष 2014 लोकसभा इलेक्शन में जेडीयू भाजपा के बिना चुनावी मैदान में थी तथा केवल दो सीटें जीत सकी थी । वर्ष 2014 चुनाव में भाजपा 22, लोक जनशक्ति पार्टी 6, कांग्रेस 2, आरजेडी 4 सीटें जीत पाई थी ।

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साल 2015 में बिहार के विधानसभा इलेक्शन में जेडीयू को 71 सीटें मिली थीं । तथा आरजेडी को 80 सीटें मिली थीं । जबकि भाजपा 53 सीट को जीतने में सफल रही थी । नीतीश कुमार ने बिहार में फिर से 2017 में आरजेडी को छोड़कर एनडीए का हाथ थामा ।

लोकसभा इलेक्शन वर्ष 2019 में एनडीए के साथ लड़कर जेडीयू 17 सीट जीतने में कामयाब रही थी । इतनी ही सीटें जब भाजपा ने भी जीती थीं ।

नीतीश कुमार का साथ क्या लोकसभा चुनाव तक

इलेक्शन सियासत से पॉलिटिक्ल एक्टिविस्ट बने प्रशांत किशोर जेडीयू में रह चुके हैं ।

प्रशांत किशोर ने जल्द ही में बताया कि भाजपा-जेडीयू का गठबंधन वर्ष 2025 के इलेक्शन तक नहीं चल पाएगा तथा नीतीश कुमार एक बार फिर पला बदलेंगे ।

थोड़ा माह पहले भी प्रशांत किशोर ने यही कहा था कि नीतीश कुमार तथा आरजेडी के साथ गठबंधन में कुछ ज़्यादा दिन तक नहीं रहेंगे ।

भाजपा को प्रशांत किशोर ने कहा नीतीश को अपने पाले में लोकसभा इलेक्शन के मद्देनज़र लिया होगा, लेकिन विधानसभा इलेक्शन में भाजपा को इसकी कीमत चुकानी होगी । प्रशांत किशोर भाजपा तथा जेडीयू दोनों के लिए काम कर चुके हैं ।

बिहार का ये नया गठबंधन भी विधानसभा इलेक्शन से पूर्व ख़त्म हो जाएगा । ये भी हो सकता है कि लोकसभा इलेक्शन समाप्त होने के कुछ माह के अंदर ही ये गठबंधन ख़त्म हो जाए ।

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