भारत के पड़ोसी देशों में चीन के दबदबे से कैसे मुक़ाबला कर रही है मोदी सरकार - सत्य न्यूज़ हिंदी

भारत के पड़ोसी देशों में चीन के दबदबे से कैसे मुक़ाबला कर रही है मोदी सरकार

हिंदुस्तान तथा मालदीव
 

हिंदुस्तान तथा मालदीव

हिंदुस्तान तथा मालदीव: आम तौर पर मालदीव के राष्ट्रपति सत्ता संभालने के बाद अपने पहले विदेश दौरे पर भारत आते रहे हैं । लेकिन मालदीव Maldives के मौजूदा राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज़्ज़ू President Muhammad Muizzu ने इस परंपरा को तोड़ दिया ।

नवंबर में राष्ट्रपति चुने जाने के बाद, भारत आने के बजाय मुइज़्ज़ू ने तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और चीन के दौरे किए है ।

मुइज़्ज़ू ने यह जता दिया है कि उनकी सरकार भारत से दूरी बनाने की नीति पर चलने वाली है ।विदेश नीति के जानकारों के मुताबिक मुइज़्ज़ू Muhammad Muizzu के चीन के पांच दिनों के दौरे से ज़ाहिर होता है कि मालदीव की विदेश नीति बदल रही है ।

हिंदुस्तान तथा मालदीव का झगड़ा

राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू जिस समय चीन के सफर पर गए थे, उस वख्त हिंदुस्तान तथा मालदीव के दरमियान इस तरह की कूटनीतिक टकराव देखने को मिला, जिसकी अंदाज़ा किसी को भी नहीं था


जिसका प्रारम्भ उस समय हुवा, जब भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने चार जनवरी को अपने लक्षद्वीप सफर की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर कीं ।

हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लक्षद्वीप को ‘आगे बढ़ाने’ का मालदीव के ही तीन उपमंत्रियों ने अच्छा नहीं माना तथा सोशल मीडिया Social Media पर उन्होंने गलत बयानबाज़ी भी की ।

‘हिंदुस्तान आउट’ घमंड

मालदीव में हिंदुस्तान विरोधी विचार वर्ष 2013 से ही सुलग रही हैं, जब से मालदीव के यामीन अब्दुल गयूम राष्ट्रपति बने हैं । यामीन, अपने सर्कार में चीन के साथ रिश्ते पकका करने की प्रयास करते रहे थे ।

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वर्ष 2018 के इलेक्शन में हिंदुस्तान समर्थक इब्राहिम मोहम्मद सोलिह Ibrahim Mohamed Solih ने यामीन को हरा दिए था । उस समय से ही यामीन ‘हिंदुस्तान आउट’ गुमान की अगुवाई करते आ रहे हैं ।

हिंदुस्तान तथा चीन के लड़ाई का मैदान बना दक्षिण एशिया

हिंदुस्तान तथा मालदीव के लगातार लड़ाई कूटनीतिक रिश्तों के पीछे केवल दोनों देशों के आपस के समीकरण नहीं हैं ।

इन सब बातों के तमाम इशारा दिख रहे हैं कि मालदीव अब अपना शक्ति प्रदर्शन, बढ़ाने की उस लड़ाई का नया अखाड़ा मैदान बन गया है । जो की हिंदुस्तान तथा चीन के बीच चल रही है ।

माना जा रहा है कि चीन, हिंदुस्तान के उन आठ पड़ोसी देशों पर कंटिन्यू अपनी वित्तीय तथा राजनीती पावर का शिकंजा कस रहा है, जो की दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय मददगार संगठन (सार्क) के सदस्य हैं ।

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