Rashifal: जानिए ज्योतिष में शनि का क्या महत्तव है?
Rashifal: सूर्यपुत्र शनि, जिनको छायानन्दन या कृष्णा नाम से भी जाना जाता है, वखाई में हमारी ज़िन्दगी का एक तजुर्बा हैं। शनि एक शीतल और क्रूर ग्रह हैऔर ज़्यादातर लोगो का एहि मानना है के ये हमारे ज़िन्दगी में कस्ट और हानि पहुंचाते हैं। बर्तमान में बोहोत सारे ऐसे ज्योतिषी हैं जो सिर्फ अपने ब्यबसायिक लाभ के लिए शनि ग्रह और शनि देव का नाम इस्तेमाल करके लोगो को डराते है। यह स्थिति बोहुत ही दुर्भाग्यजनक है।
एक प्रकृत रूप से ज्ञानप्राप्त ज्योतिष विशारद आपको यह बताने में सक्षम होंगे के ज्योतिष में शनि का भूमिका एक शिक्षक का है। हमारे अतीत कर्म या प्रारब्ध कर्म में हमारा कोई हाथ नहीं है, यह हमें भोग करना ही पड़ेगा, परन्तु हमारे बर्तमान का कर्म हमारे भविष्य निर्धारण करेगी। इसलिए ज़रूरी है के हमारे बर्तमान के कर्म अच्छे हो। तभी हम एक अच्छे भविष्य की उम्मीद कर सकते हैं।
ज्योतिष में वृहस्पति देव की भूमिका (Rashifal)
ज्योतिष में वृहस्पति देव की भूमिका भी एक शिक्षक की है, परन्तु गुरु और शनि का प्रभाब एक जातक की जीवन में काफी अलग किस्म की होती है। गुरु एक शुभ ग्रह के रूप में पूजित है, जहा शनि एक क्रूर ग्रह है जो बोहोत सारे लोगो के सामने एक डरावने सपने जैसे पेश होते है।
शनि दास है, यह कठोर संयमशील है और चाहते है के जातक न्याय के पथ में रहे। न्याय और नीति का पथ बर्तमान की कलयुग में भी श्रेष्ठ मानी जाती है। शनि का दशा या अन्तर्दशा में जातक को सजाग रहना चाहिए के वह किसी दुर्नीतिपरायण कर्म में लिप्त न हो, दरसल तम्बाकू सेवन, मदिरा इत्यादि न करे और अपने सोच-व्यबहार-अचार-विचार में शुध्यता लागु रखे।
ये भी पढ़ें:- माइंड रीडर Suhani Shah ने Dhirendra Krishna Shastri का पर्दाफाश कर दिया जानिए कैसे?
शनि का दशा Rashifal में जन्मे जातक-जातिकाएँ यह तीन नक्षत्रो में जन्मे होते हैं: पुष्य (कर्कट राशि Rashifal के अंतर्भुक्त), अनुराधा (वृश्चिक राशि के अंतर्भुक्त), और उत्तरभाद्रपद (मीन राशि के अंतर्भुक्त)। जातक के जन्मपत्रिका अनुसार उनकी जन्मकुंडली में शनि का अवस्थान यह बताती है की उनकी जीवन किस दिशा में जाने वाली है। शनि तुला राशि में उच्चस्थ होते हैं और मेष राशि में नीचस्थ। वृश्चिक राशि के लिए भी शनि Rashifal अच्छे नहीं माने जाते है क्युकी यह शत्रु ग्रह मंगल की राशि है।