राम मंदिर का बिहार में असर कैसा रहेगा, मंडल भारी या फिर कमंडल?
वर्ष 1990 के दशक में जब फैज़ाबाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर आंदोलन प्रारम्भ हुआ था, उस समय बिहार में मंडल की सियासत चल रही थी
बाबरी मस्जिद अभियान में भाजपा के सबसे ख़ास नेता लालकृष्ण आडवाणी को बिहार में ही 23 अक्टूबर वर्ष 1990 को अरेस्ट किया गया था. उस समय बिहार के सीएम लालू यादव थे
पूर्व सीएम लालू आज भी भी आडवाणी की गिरफ़्तारी का श्रेय लेते हैं तथा मानते हैं कि आडवाणी ने बिहार को रूढ़िवादिता तनाव से बचा लिया था
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22 जनवरी को फैज़ाबाद अयोध्या में जब राम लला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी उस समय बिहार की सड़कों पर भी इसका प्रभाव दिख रहा था
जबकि बिहार उन राज्यों में था , जो की फैज़ाबाद अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के शुभ अवसर पर किसी भी प्रकार की छुट्टी का ऐलान नहीं किया था
आम जनता राम मंदिर का असर
जनता का कहना है की अब 500 वर्ष का इंतज़ार समाप्त हो गया है फैज़ाबाद अयोध्या में राम मंदिर बनने से 22 जनवरी का दिन तथा समय इतिहास में दर्ज हो गया है
सियासी दलों के दावे
डीएम दिवाकर का कहना है कि “कर्पूरी के बाद अब लालू जनमानस के दूसरे सबसे बड़े नेता के तौर पर उभरे अब भी लालू यादव के साथ पिछड़ों, दलितों तथा मुसलमानों का काफी बड़ा वोट बैंक है
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और उस बैंक को बेबस करने की प्रयास भाजपा भी कर रही है नीतीश कुमार ने भी कुछ ऐसा ही किया है
नीतीश कुमार तथा लालू प्रसाद बिहार में प्रमुख पार्टियाँ आरजेडी तथा जेडीयू की प्रयास दिखती है कि वह हर मुद्दे को रोज़गार के मुद्दे की ओर ले जाए