रामनगरी के रामलला पर विपक्ष से क्या सवाल कर रहे हैं असदुद्दीन ओवैसी?
सांसद असदुद्दीन ओवैसी, सत्ताधारी भाजपा तथा विपक्ष को बराबर तेवर के साथ निशाने पर लेने के लिए पहचाने जाते हैं
एक अखबार से बातचीत में ओवैसी ने अयोध्या फैज़ाबाद में राम मंदिर से लेकर विपक्ष का मिजाज़ तथा बाबरी मस्जिद तोड़े जाने तक की घटनाओं का ज़िक्र किया तथा भाजपा तथा विपक्ष को आड़े हाथों लिया
एक ओर ओवैसी ने राम मंदिर पूजा अर्चना के कार्यक्रम को हिंदू वोटरों के उपशमन की सियासत करार दिया तथा पूछा कि अब तक जो भी हुआ है उसमें विपक्ष की किरदार भी खास रही है
ओवैसी ने कहा कि 1949 में छुप छुपा के मस्जिद में एक मूर्ति रख दी गई थी जिसके वजह से ही ये पूरा अभियान शुरू हुआ. मुस्लिमोव को मस्जिद में जाने से भी रोक दिया गया
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एक ओर जहां कोर्ट तथा सरकारों ने संघ फ़ैमिली के पक्ष में निर्णय वहीं दूसरी तरफ मुसलमानों को और अलग-अलग किया गया. उसके बाद 1992 में बाबरी मस्जिद के ढांचे को तोड़ा गया, ये भी इस युक्ति का ही हिस्सा था
मस्जिद को तोड़ने से इस जैसे और आंदोलनों को ताकत मिली
असदुद्दीन ओवैसी ने बताया कि राम मंदिर के पूजा अर्चना के साथ मोदी सरकार हिंदू वोटरों पर अपनी पकड़ मज़बूत करना चाहती हैं
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1992 में हुई कारसेवा में ख़ास किरदार निभाने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को भी अपने निशाने पर लिया तथा बताया कि उनकी निकाली रथ सफर तथा सांप्रदायिक घटनाओं में मुस्लिमों के साथ विद्रोह हुई
ओवैसी ने बताया मस्जिद की स्थान पर मंदिर होने का हक़
एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने बताया कि कोर्ट के निर्णय के बाद होने वाले राम मंदिर पूजा अर्चना ने वाराणसी मथुरा और कुछ जगहों पर ऐसे अभियान को दृढ़ किया है जो मस्जिद की स्थान पर मंदिर होने का हक़ जताते हैं
ओवैसी ने सवाल किया की 6 दिसंबर 1992 को जो कुछ भी हुआ उस पर कांग्रेस तथा विपक्ष का क्या स्टैंड है? यदि उस वक्त की जीबी पंत गावेंमेंट ने मस्जिद से मूर्ति हटा दी होती तो क्या जो आज हो रहा है वो होता? क्या न्यायालय का यही इन्साफ होता?